मराठा साम्राज्य का समुद्री किला सिंधुदुर्ग

 मराठा साम्राज्य का समुद्री किला सिंधुदुर्ग 

सिंधुदुर्ग किला महाराष्ट्र का एक समुद्री किला है। जिसका निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज ने समुद्री आक्रमण से स्वराज्य को बचाने के लिए किया था। यह किला महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवण के समुद्री इलाके में स्थित है। यह मराठा साम्राज्य का समुद्री किला सिंधुदुर्ग सिंधुदुर्ग जिले का सबसे बड़ा आकर्षण है।

मराठा साम्राज्य का समुद्री किला सिंधुदुर्ग
सिंधुदुर्ग किला फोटो

कैसे पहुंचे सिंधुदुर्ग किले पर

सिंधुदुर्ग किला पुणे से ४०० और मुंबई से ५०० किलोमीटर की दूरी पर है। मुंबई, पुणे जैसे बड़े बड़े शहरों से भी मालवण के लिए बस कि सेवा उपलब्ध है। यानी आप बस या कैब के जरिए मालवण तक पहुंच सकते है। और आगे मालवण से सिंधुदुर्ग किले तक पहुंचने के लिए बोट के सहारे जाना पड़ता है। जिसकी फी एक इंसान के लिए ₹७० है लगभग। और आप जिस बोट से जाओगे उसी बोर्ड से आप वापस भी आ सकोगे। बोट से सिर्फ १० मिनट में आप सिंधुदुर्ग किले पर वोट से पहुंच सकते हैं।

यह किला देखने के लिए आपको डेढ़ घंटे का वक्त मिलता है। सिंधुदुर्ग पर प्रवेश करने के लिए ५ रुपए का चार्ज है। अगर आपको ज्यादा वक्त यहां पर गुजारना है तो आपको ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं।

सिंधुदुर्ग किले का निर्माण

सिंधुदुर्ग किला सिंधुदुर्ग जिले के समुद्र के बीच कुरुवा नाम के द्वीप पर बनाया गया है। लगभग ५० एकड़ में फैला द्वीप  पर छत्रपति शिवाजी महाराज ने सिंधुदुर्ग किले का निर्माण लगभग ३५० साल पहले कराया था। सिंधुदुर्ग किले का निर्माण सन १६६४ में शुरू हुआ और सिर्फ ३ साल में यह किला बनकर तैयार हुआ इस किले का निर्माण बहुत तेजी से किया गया। २९ मार्च १६६७ के दिन इस किले का निर्माण पूरा हुआ। इस समय किले के उद्घाटन के समय खुद छत्रपति शिवाजी महाराज इसके किले पर मौजूद थे।

इस द्वीप पर बहुत पथरीला इलाका होने के वजह से इस किले पर आक्रमण करना बहुत मुश्किल था। यह किला चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है इसलिए यहासे दूर-दूर तक नजर रखना बहुत आसान हो जाता है। और शत्रु के आने की खबर बहुत जल्द मिल जाती है इससे युद्ध की तैयारी शत्रु आने से पहले ही हो जाती है। इस वजह से शत्रु के हमले को आसानी से नाकाम किया जा सकता है। और अगर किले पर मौजूद सैनिक पूरी तैयारी के साथ है तो हो किला शत्रु के लिए जीत पाना लगभग नामुमकिन है।

शिवाजी महाराज ने बहुत पहले ही यह भाप लिए था की डच, पोर्तुगीज, अंग्रेज और सिद्धि इन लोगों से स्वराज को खतरा था। यह लोग समुद्र से आकर स्वराज में घुसकर हमला कर सकते थे। इसलिए स्वराज को समुद्री ताकतों से बचाना बेहद जरूरी था। इस वजह से छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले का निर्माण करके अपने हिंदवी स्वराज्य को बेहद समुद्र कि तरफ से सुरक्षित बनाया। और किसी भी तरफ से स्वराज पर हमला ना हो सके इसकी खबरदारी ली। सिंधुदुर्ग के अलावा जंजीरा, नलदुर्ग जैसे किले भी समुद्री किले महाराष्ट्र के समुद्री तट के पास स्थित है।

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सिंधुदुर्ग किले का निर्माण करने वाले अभियंता हिरोजी इंदुलकर थे यह वही हिरोजी है जिन्होंने मराठाओं के स्वराज की राजधानी रायगढ़ का भी निर्माण कराया था। महाराष्ट्र के अनेक किलो की तरह इस किले का मुख्य द्वार भी दूर से नजर नहीं आ पाता। इसका फायदा किले पर पहरा देने वाले सिपाहियों को होता है। और शत्रु बहुत देर तक दरवाजा ढूंढने की कोशिश करता है। जिससे वह भ्रमित हो जाता है और तब तक किले पर मौजूद सैनिक शत्रु के बोट पर तो तोप गोले दाग देते हैं। इसके किले का मुख्य द्वार जिसे गोमुख दरवाजा कहा जाता है। यह दरवाजा बहुत ही मजबूत गूलर के पेड़ के लकड़ी से बनाया गया है। जोकि अभी भी बेहद अच्छी अवस्था में दिखाई पड़ता है।

सिंधुदुर्ग पर शिवाजी महाराज के हात और पैर के निशान

सिंधुदुर्ग किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज के बाएं पैर के और दाएं हाथ के निशांत चुने गए जो आज भी हम देख सकते हैं। शिवाजी महाराज जब सिंधुदुर्ग किले के निर्माण पूरा होने के अवसर पर यहां आए थे तभी महाराज के हात और पैर के निशान याद के तौर पर बनवाए थे। और यह निशान अभी भी सिंधुदुर्ग किले पर देखने को मिल सकते है।

श्री शिव राजेश्वर मंदिर

यह मंदिर भगवान शंकर को समर्पित है। कहा जाता है कि भगवान शंकर के रूप में शिवाजी महाराज यहां उपस्थित है। इस मंदिर का निर्माण शिवाजी महाराज के छोटे बेटे राजाराम महाराज में सन १६९५ में कराया था। इस मंदिर में शिवाजी महाराज की एक मूर्ति है। और छत्रपति शिवाजी महाराज की एक तलवार भी है। इस तलवार का नाम अभी तक पता नहीं चला।

मीठे पानी के कुंड

सिंधुदुर्ग किले पर मीठे पानी के कई कुंड उपलब्ध हैं। जिन्हें दूध विहीर, दही विहीर, सागर विहीर कहते हैं। जिससे किले पर मौजूद लोगों को पानी के लिए बाहर जाना ना पड़े। और पीने के पानी के लिए सिंधुदुर्ग आत्मनिर्भर रहे।

निगरानी बुरुज

निगरानी बुरुज सिंधुदुर्ग किले पर एक बहुत बड़ा बुरुज है। जिसका इस्तेमाल आसपास के इलाके पर नजर रखने के लिए किया जाता था। यहां से आसपास का पूरा इलाका दिखाई पड़ता है। और दूर-दूर तक नजर रखी जा सकती थी। सिंधुदुर्ग किले पर निगरानी बुरुज कि तरह लगभग २२ बुरुज है।

सिंधुदुर्ग किले की तट बंदी

सिंधुदुर्ग किले की तट बंदी लगभग २ मील दूरी तक फैली है। जिसकी ऊंचाई ३० फीट और चौड़ाई १२ फुट की है। यानी कि यह बेहद मजबूत तरबंदी किसी भी तरह के आक्रमण से किले की रक्षा करने में सक्षम है। और ३५० सालों के बाद भी यह तटबंदी अभी भी किले की रक्षा बेहद अच्छी तरह से कर रही है। इसका एक भी पत्थर ढीला नहीं हुआ सारी दिवस बहुत अच्छी हालत में है।

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