शनिवार वाडा एक रहस्य | shaniwar wada ek rahaysa - NewBlogger.in

शनिवार वाडा एक रहस्य

 शनिवार वाडा पुणे में स्थित सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध जगह है। एक समय में शनिवारवाड़ा एक बहुत बड़ा महल हुआ करता था। जो स्वराज्य के पेशवा के रहने की जगह थी। एक ब्रिटिश अधिकारी ने शनिवार वाडा के बारे में लिखते हुए कहा कि शनिवारवाड़ा बाहर से भलेही नरक लगता हो लेकिन यही शनिवार वाडा अंदर से किसी स्वर्ग के समान लगता है। शनिवार वाडा का निर्माण सतरावी शताब्दी के पेशवा पेशवा बाजीराव ने कराया था। यह उस समय एक भव्य सात मंजिला महल हुआ करता था जिसमें एक हजार से भी ज्यादा लोगो के रहने की व्यवस्था थी। लेकिन आग लगकर जल जाने की वजह से यह सब खंडहर में तब्दील हो गया है। लेकिन फिर भिं यहां बहुत सी चीजे देखनेलायक है जैसे कि इसका दरवाजा,अंदर मौजूद पत्थर से बना साचा और भी बहुत सी चीजे पर्यटकों का में मोह लेती है। 


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Shaniwar wada


अगर आप पुणे में आए और शनिवारवाड़ा नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। यह कहना जायज होगा क्योंकि पुणे की सबसे बड़ी प्रसिद्ध और घुमनेलायक कोई जगह है तो वो यही है शनिवारवाड़ा शनिवारवाड़ा घूमने के कई फायदे है वहा से पैदल बहुत सी जगह आप घूम सकते है शनिवावाड़ा से बेहद नजदीक बहुत सी जगह है जहां आप घूम सकतें है जैसे कि दगादुशेठ गणपति मंदिर, लालमहल,जुना बाजार, तुळशीबाग,मनापा भवन, आप्पा बलवंत चौक, बंड गार्डन उद्यान जैसी बहुत सी जगह है जो घूमने लायक है। ये सारी जगह पैदल दूरी पर है।

पेशवा ने कराया था शनिवारवाड़ा का निर्माण 

मराठा साम्राज्य के पेशवा के रहने की जगह के तौर पर शनिवावाड़ा का निर्माण कराया गया था। इस किले में एक साथ एक हजार लोगोंके रहने की व्यवस्था थी। ७ मंजिला यह इमारत किसी स्वर्ग से कम नहीं थी। शनिवार वाडा का निर्माण तात्कालीन पेशवा श्रीमंत बाजीराव पेशवा ने करवाया था। अपने निवास स्थान के तौर पर पेशवा ने शनिवारवाड़ा का निर्माण कराया था।

शनिवार वाडा फोर्ट महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। इसकी नीव शनिवार के दिन रखी गई थी इसलिए इसका नाम शनिवार वाडा पड़ा। शनिवरवाड़ा अपनी ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण पेशवा ने करवाया था। शनिवार वाडा फोर्ट का निर्माण मराठा स्वराज्य के पेशवा बाजीराव प्रथम ने 10 जनवरी 1913 दिन शनिवार को रखी थी। इसके बाद किले के अंदर कई इमारतें और एक फाउंटेन का निर्माण हुआ था। शनिवार वाडा फोर्ट का निर्माण राजस्थान के ठेकेदारों ने किया था। जिन्हें ही काम पूर्ण करने के बाद फेस पाने की उपाधि से नवाजा था।

इसके किले में लगी लकड़ी चुनार के जंगलों से पत्थर की खदानों से चुना जेजुरी से लाया गया था। 22 फरवरी 1827 को अज्ञात कारणों से शनिवार वाडा में आग लगी आग में पूरी तरह बुझाने में 7 दिन लगे सात दिनों तक तक इसे किले के परिसर में बनी कई इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई थी। अब केवल पत्थर का ढाचा शेष बचे हैं। इस किले की संरचना की बात करें तो इस किले में प्रवेश करने के लिए 5 दरवाजे है।

सन १८२८ की भीषण अग्नि में यह स्वर्ग समान दिखने वाली इमारत खाक हो गई।

शनिवारवाडा में देखने लायक चीजे

नगारखाना

शनिवारवाड़ा के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण दरवाजा दिल्ली दरवाजा के ऊपर बना है नगारखाणा। अभिभी बेहद प्रशस्त खड़ा यह नगारखाना लकड़ी से बना हुआ है। इसके अंदर से शनिवार वाडा के अंदर और बाहर दोनों तरफ दूर दूर तक नजर रखी जा सकती है।

९ बुरुज़

शनिवार वाडा के सुरक्षा के लिए ९ बुरूजो का निर्माण कराया गया था। यह बुरूज़ बेहद मजबूत है और हर तरफ से होने वाले हमले को प्रतिउत्तर देने के लिए काफी है। इन बुरुजो पर सैनिकों के लिए काफी जगह है एक एक बूरूज पर एक समय २५ से ३० सैनिकों के लिए पर्याप्त जगह है।

तट पर जाने के लिए ९ सीढ़ियां

शनिवार वाडा के सारे बुरुज पर जाने के लिए ९ अलग अलग सीढ़ियां बनाई गई है ताकि आपातकाल में शनिवार वाडा की रक्षा के लिहाज से जल्द से जल्द सारी तैयारियां की जा सके।

खूबसूरत फव्वारे

शनिवारवाड़ा में बेहद ही खूबसूरत फव्वारे अभीभी देखने को मिलते है जिनके बीच शाही दावत का आयोजन हुआ करता था। छत्रपति, पेशवा,मराठा सरदार की दावते यहां हुआ करती थी।

शाहू महाराज की गद्दी

शनिवारवाड़ा कुछ समय के लिए स्वराज्य की राजधानी भी रही है। इस वजह से छत्रपति शाहू महाराज की गद्दी शनिवारवाड़ा में भी है। यह छत्रपति की गद्दी आग में खाक तो हो चुकी है लेकिन उसकी याद अभी भी इस शनिवार वाडा में ताजा है। स्वराज्य की किसी भी वास्तु में छत्रपति की गद्दी होना उस वास्तु को बहुत अधिक सम्मानित करता है।

हजारी कारंजा 

१६ पंखुड़ियां और १००० फव्वारे दुनिया में अपनी तरह का दुनिया का अकेला कारांजा इसे हजारी कारांजा कहा जाता है। इसके १००० फव्वारे शनिवार वाडा के हर कोने से दिख जाते है। बेहद ही खूबसूरत यह कारंजा जिसमें १००० फव्वारे है और उसके बीच १६ कमल की पंखुड़ियों से सजा कारांजा देखनेभर से मन प्रसन्न हो जाता है।

बड़े माधवराव पेशवा का निवास स्थान

शनिवारवाड़ा काफी समय तक बड़े माधवराव पेशवा का निवास स्थान बना हुआ था। बड़े माधवराव पेशवा ने अपनी जिंदगी का ज्यादा समय अगर कहीं बिताया है तो इसी शनिवारवाड़ा में। बड़े माधवराव पेशवा का निवास स्थान रहा इस शनिवार वाडा ने अपने समय के हर एक शुर मराठा पेशवा छत्रपति और मावलो को देखा है। इस वजह से अपनी तरह की यह अकेली इमारत है जो पहाड़ी पर नही बनने के बावजूद स्वराज्य कि राजधानी रही और काफी लंबे समय तक रही।

दादासाहेब श्रीमंत रघुनाथ राव का निवास स्थान

अपने सगे भतीजे नारायणराव पेशवा के हत्या के जिम्मेदार रघुनाथ राव का मराठा साम्राज्य के विस्तार में बड़ा हिस्सा रहा। उनका भी निवास स्थान यह शनिवार वाडा रह चुका है। ऐसा कहा जाता है कि श्रीमंत रघुनाथ राव ने अपने सगे भतीजे नारायण राव पेशवा की हत्या कराई। हालाकि इस वजह से रघुनाथ राव का स्वराज्य के विस्तार में दिया योगदान नहीं भुला जा सकता।

दीवानखाना (गणपति रंग महल)

गणपती रंग महल में एक बार में १०० से ज्यादा नृत्यांगनाएं एकसाथ नृत्य कर सकती थी इतनी बड़ी जगह है ये अंग्रेज अधिकारी कप्तान मूर ने भी एक बार शनिवारवाड़ा को भेट दी थी। उस समय गणपती रंग महल में नृत्य सादर किया गया था। उसकी याद कप्तान मूर ने अपनी पुस्तक में लिखी है। शनिवारवाड़ा का वर्णन करते हुए कप्तान मूर लिखते है कि शनिवारवाड़ा बाहर से भलेही नरक लगे लेकिन अंदर से किसी भी स्वर्ग से कम नहीं लगता है। किसी भी चीज को कमी शनिवारवाड़ा में नहीं है।

बकुल का पेड़

शनिवरवाड़ा में कोई भी धार्मिक विधि के लिए बाहर से फूल नहीं लाया करते थे शनिवारवाड़ा के अंदर ही फूल के पेड़ लगे हुए थे। उन्हीं में से एक पेड़ है बकुल का पेड़।

आठ तोटिचे फव्वारे

आठ टोटिचे फव्वारे यह फव्वारा उन्हीं फव्वारों में से है जो शनिवार वाडा की सुंदरता को बढ़ातें है। यहिपर गिरकर सातवे पेशवा सवाई माधवराव की मृत्यु हुई थी। इस फव्वारे में आठ फव्वारे है जिनसे मिलकर यह एक फव्वारा बनता है।

नानासहेब पेशवा का आरसा महल

नाना साहेब पेशवा का आरासा महल यह एकलौती ऐसी चीज है जो १८२८ की भीषण अग्नि में बचने में कामयाब रही लेकिन अब यह अारासा महल आपको देखने नहीं मिलेगा।

शनिवार वाडा के दरवाजे

शनिवार वाडा में कुल पांच दरवाजे है जों की नीचे दिए गए है।

दिल्ली दरवाजा
दिल्ली दरवाजा शनिवारवाड़ा का सबसे बड़ा और अहम दरवाजा है। इसी दरवाजा से लोग शनिवारवाड़ा में आते जाते है। दिल्ली दरवाजा के उपर नगरखाणा है जो कि लकड़ी का बना है। दिल्ली दरवाजा को तोड़ न पाये इसलिए दरवाजे के ऊपर बड़े बड़े किल लगाए है। और नगारखाना से सीधा दरवाजे के सामने की ओर बंदूक से निशाना लगाया जा सकता है। यह दरवाजा शनिवारवाड़ा के सामने की ओर है।

दिल्ली दरवाजा शनिवारवाड़ा का सबसे प्रमुख गेट है जो उत्तर दिशा यानी कि दिल्ली की तरफ होता है इसलिए इसे कहते हैं दिल्ली दरवाजा कहते हैं और चौराहे की पालकी हाथी आराम से आ जा सकते हैं। हाथियों से दरवाजे को बचाने के लिए दोनों और 12 इंच लंबे किल है। जोकि हाथी के माथे के बराबर है। जिससे अगर हाथी अपने माथे से टकराकर दरवाजा तोड़ने की कोशश करेगा तो हाती को जोरदार चोट आएगी।

नारायण दरवाजा
यही पर १६ साल के नारायण राव की हत्या की गई थी। कहते है कि इसीलिए यहापर काका मला वाचवा की आवाज गूंजती है। यह दरवाजा अभी बंद है। इसका आवाजाही के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।
पांचवां और आखिरी दरवाजा नारायण दरवाजा दरवाजा दक्षिण दिशा में खुलता है आने जाने का कारण का नारायण पार्क उसकी लाश के टुकड़ों को इसी रास्ते द्वारा लेकर बाहर ले जाया गया था। इसलिए से नारायण कवच भी कहा जाता है।

गणेश दरवाजा
गणेश दरवाजा के बगल में भगवान गणेश जी की प्रतिमा है इसीलिए इस दरवाजे को गणेश दरवाजा कहा जाता है। लेकिन यह दरवाजा भी अभी बंद है। यह दरवाजा दक्षिण पूर्व दिशा में खुलता है यह दरवाजा किला परिसर में स्थित गणेश रंग महल के पास स्थित है इसलिए इसे गणेश दरवाजा कहते हैं।

मस्तानी दरवाजा
बाजीराव की पत्नी मस्तानी जिस दरवाजे का इस्तेमाल किले से बाहर आने जाने के लिए उपयोग करती थी। इसलिए इसका नाम मस्तानी दरवाजा रखा गया वैसे इसका एक और नाम है।
मस्तानी और समशेरबहादुर बचकर भागे थे जो कि श्रीमंत बाजीराव पेशवा की दूसरी बीवी और बच्चा थे। लेकिन मस्तानी शनिवार वाडा में बहुत से लोगो को पसंद नहीं थी इसलिए उसे और समशेरबहादुर को मारने का प्रयास कई बार किया गया था। उसिके नाम पर इस दरवाजे का नाम मस्तानी दरवाजा पड़ा।

शनिवारवाड़ा रहस्य

कई लोगो का मानना है कि शनिवारवाड़ा में रात के समय अजीब अजीब आवाजें आती है। रोने की गुहार लगाने की कई लोगो का मानना है कि खुद नारायण राव की रोने कि आवाज आती है और चिल्लाने की की काका मला वाचवा यह आवाज रात के समय गूंजती है। हालाकि इसका कोई भी प्रमाण मौजूद नहीं है कि यहां इस तरह की रहस्यमय आवाजे गूंजती है या नहीं। नाना साहेब पेशवा के 3 पुत्र थे विष्णु महादेव राम और नारायणराव। सबसे बड़े पुत्र शिवराम पानीपत की तीसरी लड़ाई में मारे गए थे नाना साहेब की मृत्यु के उपरांत को गद्दी पर बैठाया गया पानीपत की तीसरी लड़ाई में महादेव रामपति रणनीति बनाने की पूरी जिम्मेदारी लेकिन उनकी बनाई हुई कुछ रणनीति हम पूरी तरह से मात्र 16 साल की उम्र में नारायणराव पेशवा बने नाना साहब के छोटे भाई रघुनाथ राम जाने के कारण उनके चाचा नारायण राव को पेशवा बनाते हुए नहि देखना चाहते थे। राज्य में ही एक शिकारी कबीला रहता था जो की गति कहलाते थे। नारायण राव के साथ उनके संबंध खराब थे। इसलिए एक रात में रघुनाथ राव ने इस कबीले के साथ मिलकर पेशवा नारायण राव को मरवाया। 
ऐसी बहुत सी अफवाहें फैलाई गई है कि शनिवार वाडा एक भूतिया जगह है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। कई सारे लोग रात के समय हमेशा रात के समय शनिवार वाडा के आस पास रहते है। कई सारी दुकानें है। हमेशा बहुत चहल पहल रहती है। लेकिन अभीतक कोई ऐसा आदमी नहीं मिला जिसने काका मला वाचावा ऐसी आवाजे सुनी हो। मतलब ये कि शनिवार वाडा मराठा साम्राज्य के इतिहास को दर्शाता है। ना कि कोई भूतिया जगह है।


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