पुरंदर की संधि मराठो की हार में भी जीत | purandar ki sandhi

पुरंदर की संधि मराठो की हार में भी जीत

औरंगजेब बादशाह स्वराज्य पर लगातार आक्रमण कर रहा था। हर तरफ से दुश्मन हमला कर रहे थे। इससे स्वराज्य की बहुत हानी हो रही थी। इसलिए मुघलों को करारा जवाब देना मराठाओं के लिए बेहद जरूरी हो गया था। यह जवाब आज के गुजरात के सूरत शहर पर छापा मार के दिया गया। सूरत शहर उस समय बेहद बड़ी बाजारपेठ हुआ करती थी और औरंगजेब की सबसे पसंदीदा जगह हुआ करती थी। उस समय सूरत मुगल सल्तनत का बेहद अमीर और खूबसूरत शहर हुआ करता था इस शहर पर छापा मारकर स्वराज्य को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई भी की जा सकती थी। ऐसा मराठाओं का मानना था। ऐसी बहुत सी वजहों से सूरत शहर हो चुना गया। 

purandar ki sandhi 1776 in hindi
Purnadar treaty 1676


सूरत पर छापा मुगल बादशाह औरंगजेब को कड़ा तमाचा होने वाला था। आखिर सूरत शहर पर छापा मारा गया बहुत सारा धन हासिल हुआ। लेकिन मराठों की उम्मीद से बहुत ज्यादा औरंगजेब आहत हुआ। अब मराठाओं को आखरी और सबसे बड़ा सबक सिखाना औरंगजेब के लिए बेहद जरूरी हो गया था। उसने अपने सबसे भरोसेमंद सरदार मिर्जा राजे जयसिंग को शिवाजी महाराज और स्वराज्य पर हमला करने के लिए चुना और उसके साथ लगभग चौदा लाख सैनिक और तमाम गोला बारूद असले के साथ स्वराज्य पर हमला करने के लिए भेजा। मिर्जा राजे जयसिंग हिन्दू राजपूत घराने से थे। बेहद तेज बुद्धि, लड़ाई और कूटनीति में माहिर, ४६ वर्षों का अनुभव ऐसा उनका व्यक्तिमत्व था। मिर्जा राजे जयसिंग ने अबतक जो भी मुहिम हात में लि उसे पूरा ही करके वापिस लौटे थे। मुघलों का सबसे भरोसेमंद सरदार के नाम से उसकी पहचान थी। 

मुगल बादशाह औरंगजेब ने तो मिर्जा राजे जयसिंग को स्वराज्य पर कब्जा करने के मकसद के साथ भेजा था पर वो भी जानता था कि यह सब इतना आसान नहीं होने वाला। इसके लिए मिर्जा राजे जयसिंग ने स्वराज्य के बड़े किलो पर कब्जा करने के बजाए छोटे छोटे किले और बाजारों पर कब्जा करना शुरू किया। इससे स्वराज्य में बड़े किले के बीच आवाजाही को रोक दिया और फिर लाख कोशिश करने के बावजूद स्वराज्य के सैनिक इतनी बड़ी सेना का सामना नहीं कर सकते थे ये बात पुरंदर का किला बचाते हुए शिवाजी महाराज को समज आ गई थी। और फिर जंग और बढ़ी तो फायदा तो बिल्कुल होने वाला नहीं था उल्टा स्वराज्य का अस्तित्व खतरे में आ सकता था। 

शिवाजी महाराज स्वराज्य के लोगो से बहुत प्यार करते थे। वो जानते थे कि हारे हुए किले फिरसे जीते जा सकते है लेकिन युद्ध कि वजह से शहीद हुए मजबूत किले जैसे सैनिकों को वापिस नहीं लाया जा सकता। इसलिए शिवाजी महाराज ने मिर्जा राजे जयसिंग को संधि करने के लिए मना लिया।

 मिर्जा राजे जयसिंग कभी सोचकर ही नहीं आाया था कि कभी उसे संधि करनी पड़ेगी लेकिन युद्ध में हार होते हुए देखकर भी शिवाजी महाराज ने मिर्जा राजे जयसिंग को संधि करने के लिए मजबूर कर दिया। इस सुलह की वजह से के ऐसे ही कई फैसलों की वजह से स्वराज्य आखीर तक टीका रहा। हालाकि मिर्जा राजे जयसिंग एक हिन्दू थे इसलिए सुलह करने से पहले शिवाजी महाराज ने मिर्जा रहे जयसिंग को स्वराज्य के काम में शामिल होने का प्रस्ताव रखा लेकिन मिर्जा राजे ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 
 
आखिर में संधि करनी पड़ी यह सुलह पुरंदर किले पर हुई इसलिए इस घटना को पुरंदर की संधि (पुरंदर चा तह) के नाम से जाना जाता है। और जब सुलह की बातचीत शुरू हुई तो स्वराज्य के कोंढाना, पुरंदर,रायगढ़ जैसे २३ बड़े किले और चार लाख होन मुघलों को सौंपेंगे का फैसला हुआ। और प्रतापगढ राजगढ जैसे १२ किले शिवाजी महाराज के आधिपत्य में रहने वाले थे। इसके साथ साथ शिवाजी महाराज और स्वराज्य के युवराज संभाजी महाराज को भी औरंगजेब के जन्मदिन के मौके पर आग्रा में औरंगजेब के दरबार में हाजिर होना था। और सुलह कि यह शर्त आगे जाकर स्वराज्य के लिए हानिकारक बनी। 

जब शिवाजी महाराज और उनके बेटे संभाजी महाराज औरंगजेब के जन्मदिन के मौके पर अाग्रा पहुंचे तो वहां पर उन्हे उचित सम्मान नहीं दिया गया। इस वजह से शिवाजी महाराज भरे दरबार में औरंगजेब पर बहुत क्रोधित हुए। इसलिए बादशाह औरंगजेब ने शिवाजी महाराज और उनके बेटे संभाजी महाराज को नजर कैद कर लिया। लेकिन फिर बादमें अपनी बीमारी का बहाना बनाकर शिवाजी महाराज औरंगजेब की पकड़ से निकलने में सफल हो गए।
 
हालाकि सुलह में हारे हुए सारे किलो को फिर से छत्रपति शिवाजी महाराज ने जीत लिया और आगे के समय में मुघलों के खिलाफ बहुत बड़ी बड़ी कार्रवाई भी मराठाओं की तरफ से कि गई।

पुरंदर के संधि के कुछ महत्वपूर्ण नियम

  • शिवाजी महाराज औरंगजेब को स्वराज्य के २३ किलो को मुघलों को सौंपना होगा।
  • उसिके साथ साथ मुघलों को १ लाख होन का भुगतान करना होगा।
  • जब भी मुगल सल्तनत को मदद की आवश्यकता पड़ेगी तब मराठा मदद करेंगे।
  • और अगर शिवाजी महाराज कोकण और वीजापुर का इलाका चाहते है तो उन्हे मुघलों को ४० लाख होन का भुगतान करना होगा।
  • शिवाजी महाराज के बड़े बेटे संभाजी महाराज मुघलों के लिए मंसबदार रहेंगे।

इनकिलो  पर मुघलों का कब्जा होगा

  1. पुरंदर
  2. रुद्रमल
  3. कोंढाना
  4. कर्नाला
  5. लोहागढ़
  6. इसागाद
  7. तुंग
  8. तिकोना
  9. रोहिड़ा किला
  10. नलदुर्ग
  11. माहुली
  12. भंडारदुर्ग
  13. पलसखोल
  14. रूपगढ़
  15. बख्तगड
  16. मोरबखान
  17. मानिकगढ़
  18. सरूपगढ
  19. सकदगढ़
  20. सक्तेगड़

टिप्पणियां

  1. माहिती छान आहे ....वाचायला इंटरेस्ट येतो, पण प्रत्येक ब्लॉग वर हिंट द्या की पुढचा ब्लॉग कशावर असेल जेणेकरून इंटरेस्टेड वाचक परत येईल....🙏🙏

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