राजगढ किला स्वराज्य की पहली राजधानी

राजगढ किला स्वराज्य की पहली राजधानी

राजगढ किला पुणे से ६० km दूर गुंजवने गांव के पास १३९४ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चार नदियों के बीच ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला शिवाजी महाराज द्वारा स्थापना किए गए स्वराज्य की पहली राजधानी बना। यह किला करीब २००० साल पुराना है। इसका निर्माण पहले शतक के गोतामिपुत्र सतकर्णी ने कराया था। किले के चारो तरफ नदियां और दुर्गम इलाकों के होने की वजह से यह किला मावल प्रांत पर सत्ता काबिज करने के लिए और स्वराज्य का विस्तार करने के लिए काफी मददगार साबित हुआ। इस किले से
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Rajgad Fort

राजगढ पर कैसे जाये

राजगढ़ पर चढाई करने के ३-४ रास्ते है लेकिन ज्यादातर लोग राजमार्ग और चोर दरवाजे से ऊपर जाना पसंद करते है।

सड़क मार्ग

बस या कैब से आप किले के नीचे गुंजवने गांव तक जा सकते है। सड़क मार्ग काफी अच्छा है। सबसे नजदीक का बसस्थानक यहां गुंजवने गांव में ही है। यहां से आगे किले पर जाने के लिए चलकर जाना होता है।

रेल्वे मार्ग

किले से सबसे नजदीकी रेलवे स्थानक पुणे रेल्वे स्टेशन है। यहासे आगे सड़क मार्ग से गुजंवने गांव तक रास्ता तय करना होता है।

हवाई मार्ग

हवाई मार्ग से आप पुणे एयरपोर्ट तक जा सकते है। यहासे आगे कैब या बस से  बाकी का रास्ता तय करना होता है।

राजगढ पर ट्रेकिंग

राजगढ पर ट्रेकिंग करने के लिए साधारण २-३ घंटे का वक्त लगता है। चोर दरवाजे की तरफ से ट्रेकिंग करना ट्रेकर्स की पसंद होती है। इस किले पर रहने के और पानी की व्यवस्था होने के कारण १-२ बोतल पानी काफी होता है। ट्रेकिंग करते वक्त प्रॉपर ट्रेकिंग के साधनों के साथ जाए तो बेहतर होगा। राजगढ पर चढाई करने के लिए अच्छी ग्रिप वाले जूते होना जरूरी है। क्योंकि ट्रेकिंग रास्ते कुछ जगह बहुत संकरी और फिसलन भरे है। किले पर देखने लायक बहुत सी जगह है इसलिए सुबह जल्दी किले पर पहुंचे तो दिनभर किले पर घूम सकते है और नजारो का आनंद ले सकते है।

राजगढ के आकर्षण

राजगढ के दरवाजे

चोर दरवाजा

महारानी सईबाई समाधी

छत्रपति

राजगढ़ की माचियां

बालेकिला

अगर किले पर कोई आक्रमण होता है तो किले कि सबसे सुरक्षित जगह होती है बालेकिला । राजगढ स्वराज्य की राजधानी थी इसलिए इस किले का बालेकिला बेहद मजबूत होना जरूरी भी था। इस बालेकिले पर जाने के लिए खड़ी चढ़ाई करनी होती है। एक वक्त एक ही आदमी ऊपर जा सकता है। कुछ सीढ़ियां चड़ने के तुरंत बाद बालेकिला का दरवाजा दिखता है। इसका नाम महा दरवाजा है। इस दरवाजे को पार करने के बाद आप बालेकिले में पहुंच जाते हो। बालेकिले की इस कठीन रचना की वजह से यह किले कि सबसे सुरक्षित जगह बन जाती है।

राजगढ पर मौजूद तालाब

पद्मावती तालाब

Padmavati talab on rajgadh image
Padmavati talab

राजगढ पर मंदिर

रामेश्वर मंदिर

पद्मावती मंदिर

अंबरखाना

अंबरखाना किले के धान्य कोठार को कहा जाता था। इस अंबरखाने में किले के लोगो के लिए रसद रखी जाती थी। किले पर मौजूद सैनिकों के लिए खाने पीने के सामान का इंतेजाम बड़े पैमाने पर किया जाता था। क्योंकि अगर किले को दुश्मन सेना ने घेर लिया तो किले पर मौजूद सैनिकों को किसी चीज की कमी ना पड़े ज्यादा देर तक दुश्मन सेना को प्रत्युत्तर दे सके इसलिए अंबर खाने में बहुत बड़े पैमाने में अन्न धान्य रखा जाता था। ताकि लंबे समय तक किले को बाहर से कोई मदत ना मिल सके तो भी किले पर मौजूद लोग बिना किसी बाहरी मदद से प्रतिकार कर सके।

सैन्य कोठार

सैन्य कोठार में सैनिकों के लिए लगने वाले सारे हथियार, दारू गोले रखे जाते थे। यह एक बहुत बड़ी जगह है। इस सैन्य कोठार को बेहद कडी सुरक्षा में रखा जाता था। इस जगह को हमेशा सुरक्षित रखा जाना जरूरी था। क्योंकि किले कि यह जगह दुश्मन के हाथ लगती है तो दुश्मन के जीतने के चांसेज ज्यादा रहते है।

सदर/सरनोबत का घर

सदर किले कि सबसे महत्वपूर्ण वास्तु मानी जाती है। यही पर शिवाजी महाराज अपना दरबार चलाते थे। स्वराज्य के अनेक फैसले यही पर लिए गए है। इस सदर का पुनर्निर्माण किया गया है। इसलिए सदर बहुत आकर्षक और देखने लायक है। लेकिन काफी लोगो का मानना है कि ये कोई सदर नहीं बल्कि किले के तट सरनोबत का घर है।

राजवाडा

राजगढ पर शिवाजी महाराज के रहने के लिए राजवाडे का निर्माण किया गया था। बहुत सुंदर और बड़ा यह राजवाड़ा किले के

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