मकर संक्रांति

मकर संक्रांति


मकर संक्रांति हर साल मे,जनवरी अंग्रेजी महिने में और मराठी पौष महिने मनाई जाती है। मकर संक्रांति ये त्योहर भारत के ज्यादा तर राज्यो मे मनाया जाता है। कई जगह पर मकर संक्रांति को उतरयान भी  कहा जाता है। हर साल मकर  संक्रांति अलग-अलग वाहनो पर, विविध प्रकार वस्त्र पहनकर प्रवेश करती है। जनवरी से अच्छे दिन की शुरुवात होती है, ऐसा इसलिये की सूर्य धनु राशी से मकर राशी मे प्रवेश करता है। मकर संक्रांति इसी वजह से मनाई जाती है। ऐसा भी माना जाता है, की मकर संक्रांति के बाद सर्दीयो को दीन कम होने लगते हैं,और दुसरा मोसम शुरू होता है। मकर  संक्रांति एक रंग पेहेन कर आती है, जिसे अशुभ माना जाता है, उस दीन महिलाये उस रंग के कपडे नही पेहेंनती।
इसी दीन पुण्य का काम करना पवित्र माना जाता है। इस दीन लोग दान-धरम करते है। मकर संक्रांति के दीन कई राज्ये में बहुत उत्साह के साथ पतंग भी उडाई जाती है। 
गंगा स्नान को उस दीन पवित्र माना जाता है।
ये दीन सुख-शांति का दीन माना जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक दोनो ही दृष्टिकोन से मकर संक्रांति पर्व खास महत्त्व रखता है। पौराणिक कथा वो अनुसार इस दीन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते है। यह पर्व पिता-पुत्र के अनुखे मिलन को दर्शाता है। मकर संक्रांति के दौरान तिल और गुल से बने मिठे लड्डू या अन्य मिठे पकवन बनाने की परंपरा हैं।

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